आग कहते हैं, औरत को,
भट्टी में बच्चा पका लो,
चाहे तो रोटियाँ पकवा लो,
चाहे तो अपने को जला लो,
बिना इसकी तपिस से तपे,
आज तक कोई न,निकला,
चाहे वो बच्चा बन निकला,
चाहे विश्वामित्र बन निकला,
चिंगारी इसी की लिए,
बाती अपनी जला ली,
किसी ने घर फूँक लिए,
किसी ने देह जला ली,
रोशन जहाँ हुआ है,
रौशनी इसके पास है,
न भाग इससे यूँ ही,
इसी का तो प्रकाश है,
..... सियाना मस्कीनी
.
भट्टी में बच्चा पका लो,
चाहे तो रोटियाँ पकवा लो,
चाहे तो अपने को जला लो,
बिना इसकी तपिस से तपे,
आज तक कोई न,निकला,
चाहे वो बच्चा बन निकला,
चाहे विश्वामित्र बन निकला,
चिंगारी इसी की लिए,
बाती अपनी जला ली,
किसी ने घर फूँक लिए,
किसी ने देह जला ली,
रोशन जहाँ हुआ है,
रौशनी इसके पास है,
न भाग इससे यूँ ही,
इसी का तो प्रकाश है,
..... सियाना मस्कीनी
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