मीरा बनने के चक्कर में, किस-किस ने घर न छोड़ा,
कौन-कौन कहाँ न फंसी, किस-किस ने कब है छोड़ा,
बहुत बेदर्द कहानी है, हर स्त्री की जुबानी है,
बात बहुत पुरानी है, झेली यह जिंदगानी है,
घर से बाहर कदम रखा, हर आँख ने तक के रखा,
मंसूबा सभी ने बना के रखा, महबूबा बक के कहा,
क्या बयाँ करूँ दास्ताँ, मेरी भी वही है,
मैं तो चुप ही रह गई, तुने बात कही है,
..... सियाना मस्कीनी
.
.
कौन-कौन कहाँ न फंसी, किस-किस ने कब है छोड़ा,
बहुत बेदर्द कहानी है, हर स्त्री की जुबानी है,
बात बहुत पुरानी है, झेली यह जिंदगानी है,
घर से बाहर कदम रखा, हर आँख ने तक के रखा,
मंसूबा सभी ने बना के रखा, महबूबा बक के कहा,
क्या बयाँ करूँ दास्ताँ, मेरी भी वही है,
मैं तो चुप ही रह गई, तुने बात कही है,
..... सियाना मस्कीनी
.
.
No comments:
Post a Comment